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Saturday, 16 November 2019

Treatment of stomach problems (Piles/constipation) with Yoga and Ayurveda method(Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira

बवासीर
कुछ दिन पहले बहुत से लोगो द्वारा बवासीर के इलाज के तरीके पूछा जा रहा था। मुझे कई लोगो ने वहां बोला कि इसके लिए सही योग विधि बताऊ।
यहां मैं बवासीर के इलाज के लिए कुछ तरीके बताऊंगा जिनके प्रयोग से मैं ठीक हुआ ही हु, साथ ही कई और लोगो के सकारात्मक प्रतिक्रियाये मिली है।
मेरा चिकित्सा या मेडिकल साइंस से कोई सम्बन्ध नही पर यदि हम स्वास्थ्य शरीर चाहते है तो इसके लिए हमे अपने शरीर के प्रति जागरूक होना ही पड़ता है। इसके लिए कोई MBBS या MD जैसी बड़ी डिग्रियों की जरूरत नही। लगभग हर बड़ी छोटी बीमारियों का इलाज आप स्वयं कर सकते है यदि आप इसको समझे और योग विज्ञान की जानकारी रखते हो।
बवासीर होना मल द्वार पर सूजन हो जाने हो कहते है। आपने देखा होगा कि जब किसी के पेट मे सूजन होता है तो डॉक्टर गर्म पानी बोतल में भर कर पेट पर घुमाने को कहता है। ऐसा ही एक छोटा सा प्रयोग है जो आप करके बहुत बेहतर लाभ ले सकते है।
इस प्रयोग के लिए आप किसी बड़े मुह वाले टब लेना होगा। शायद आपके बाथरूम में होगा ऐसा कुछ जिसमे कपडे ढोये जाते होंगे। उसमे हल्का गर्म पानी भर लीजिये और नंगा होकर अपने पीछे का भाग पानी मे इस प्रकार डुबोये की मल द्वार पानी के संपर्क में आ सके। यह प्रयोग आपको शीघ्र लाभ देगा।
Treatment of stomach problems (Piles/constipation)
 with Yoga and Ayurveda method
Treatment of stomach problems (Piles/constipation)
with Yoga and Ayurveda method
दूसरा एक बहुत महत्वपूर्ण विज्ञान है acupressure point का। acupressure points से इलाज तो एकदम चमत्कारिक रूप से काम करते है। इसके लिए इस पोस्ट के साथ कुछ तश्वीरे डाल रहा, उस points को आप सुबह शाम दबाया करिये, या जब याद आये दबाते रहिये। तश्वीर में जिन जिन हिस्सो को पेन से mark किया गया है, उनको दबाते रहिये अंगूठे से। pic no 2 के लिए अपने अंगूठे से नीचे आइए। जॉइंट के नीचे जहा से कलाई मुड़ती है उसी के पास वो हिस्सा थोड़ा उठा हुआ होता है, उसको दबाना है। जो एक्यूप्रेशर के पॉइंट बताएं हैं उसमें उनको करने के बाद सबसे आखिर में हाथों की हथेलियों का बिल्कुल मध्य भाग को जरूर दबाएं l यह मध्यम पॉइंट किडनी के होते हैं और आखरी में इनका दबाया जाना जरूरी है lआपके निचले होंठो के मध्य भाग के नीचे के पूरे भाग को दबाते रहिये। ये सभी points दोनो हाथों में और सम्भव हो तो पैर में भी दबाए।


Treatment of stomach problems (Piles/constipation)
 with Yoga and Ayurveda method
तीसरी विधि योग की है। आप पेट से जुड़े आसन करिये। बवासीर की पूरी समस्या ही पेट की समस्या से शुरू होती है।
खास तौर पर मंडूकासन जरूर करे। मंडूकासन बवासीर की समस्या में बहुत लाभदायक है। ध्यान रहे योग की विधियां खाली पेट ही करे। बेहतर हो आप सुबह में ही करे बस। अपने दिनचर्या में 45 मिनट का योग के लिए समय अवश्य बना ले, फिर कोई बीमारी ही नही आएगी पास कभी। सूर्य नमस्कार अपनी सूची में शामिल करें, यह बहुत सी बीमारियो को दूर से ही bye bye कर देने की शक्ति रखता है।
चौथी एक विधि है जो कि स्वामी रामदेव जी से मैंने सुना था पर कभी किसी पे प्रयोग कराने का मौका नही मिला। स्वामी रामदेव के अनुसार इस प्रयोग से 3-7 दिन में बड़ी से बड़ी बवासीर ठीक हो जाएगी। इसके लिए आपको सुबह खाली पेट एक कप दूध में एक नींबू निचोड़ के पी जाए बस। यह प्रयोग आपको रोज करना है 3-7 दिन तक।
सबसे मुख्य बात- बवासीर की बीमारी अनुचित खान पान से होती है। कम खाये पर ऐसी चीजें खाये जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो। खाना वो सही होता है जो जिंदा हो। मरा हुआ खाना कभी भी आपमें उतनी अच्छी जीवन ऊर्जा नही दे पाएगी जितना जीवित खाना देती है। जीवित खाना अर्थात ऐसी चीजें जो मृत नही हो, अर्थात जिसे पकाया ना गया हो, जैसे भिगोया हुआ चना, फल, फूल इत्यादि।
पानी पीने की मात्रा बढ़ाये।
सुबह बिना कुल्ला किये 8 घुट पानी अवश्य पिये।
मसाला कम कर दे खाना। और बवासीर की समस्या है तो लगभग बंद ही कर दे।
अगर आप उपर्लिखित चीजो का ईमानदारी से पहल करते है तो आपकी बवासीर बिल्कुल ठीक हो जाएगी। इस बात को गांठ बांध लें कि आप अपने शरीर और मन के डॉक्टर आप स्वयं बन सकते हो। पेट की स्वास्थ्य के लिए मैं कुछ जरूरी योगाभ्यास बताऊंगा अगले पोस्ट में । तब तक आप इन प्रयोगों को करे।
(मेरे इस लेख में कोई कमी या गलती आपको नजर आये तो सुधार के लिए जरूर कमेंट करे।)
भगवान आप सबको स्वस्थ रखे।
-कबीरा

Monday, 7 October 2019

Beautiful memory of my first love. A short story by Suraj Jaiswal Kabira (Hindi)

मैं कक्षा 8वी में था जब एक बहुत ही सुंदर लड़की के साथ प्रेम संबंध में था। उसकी सुंदरता की कल्पना करता हु तो उसके बाद मेरे जीवन में आये कई प्रेमिकाओं में से किसी मे वो सुंदरता नजर नही आती। सुंदरता सिर्फ शरीर का ही नही, उसके साथ रहें मेरे पवित्र सम्बन्ध में भी था। यदि आप प्रेम संबंध में शारीरिक संबंध को महत्व देते हैं तो आप हमारे इस रिश्तें को प्रेम संबंध ना कहकर सिर्फ दोस्ती ही नाम दे, क्योकि मैंने पहले ही कहा कि यह रिश्ता बहुत पवित्र था, क्योकि उस बाल्यावस्था में सिर्फ उसका साथ होना ही हृदय को पुलकित कर देता था। स्कूल में सबसे पहले पहुचना, और साथ मे दिन के सबसे खूबसूरत लम्हा व्यतीत करना, लंच टाइम में भी जहा सभी आपस में खेलने में व्यस्त रहते, हम अपनी ही दुनिया मे मस्त रहतें। हमारी कक्षायें अलग होने का कारण सिर्फ तभी मिल पाते थे जब क्लास ना लग रही हो। स्कूल में भी दोस्तो के बीच हमारी प्रेमकहानी मशहूर हो गयी थी।
Beautiful memory of my first love.
A short  story by Suraj Jaiswal Kabira (Hindi)


स्कूल समय मे रहने वाला साथी कब तक साथ रहता। जाना उसे भी था। उससे मुझे अलग हुए 8 साल से ज्यादा हो गया पर कभी भी मुझे उसके साथ ना होने का दुःख नही हुआ, ना ही कभी उसे याद करतें करतें दुःखी होकर उसके लिए कोई कविता या शायरी ही लिखी। उसके बाद आई कई  प्रेमिकाओं के साथ बितायें लम्हो को अक्सर अपनी डायरी में कविता या कहानी के रूप में उकेडता रहता हूं। मुझे उसकी याद नही आती क्योकि मैंने उसके साथ जितने भी लम्हें जीये, उसी पल में जीये। हमने कभी भी सपने नही देखे थे अपनी शादी के या किसी शायर की तरह चाँद पर घर बसाने की। हमे कभी भी उसकी जरूरत नही महसूस हुई, और ना ही कभी याद रहा कि ऐसा भी कुछ होता होगा। हमने किसी भी पल में भविष्य की कोई काल्पनिक दुनिया नही बसाई। आज मैं जिस उम्र के पड़ाव पर हु यहां मुझे महसूस होती है कि कोई साथ होता, पर कभी ऐसा नही सोच पाया कि वो साथ होती। और यदि वो होती तो शायद अभी के माहौल के अनुसार हमारा प्रेम उतना पवित्र भी नही रह पाता। हमने कभी कोई ऐसी दुनिया देखी ही नही थी जो भविष्य में हम साथ हो। जो जैसा लम्हा था उसको जीये, सौ फीसदी जिये।

ऐसा नही है कि उसको भूल चुका हूं। सम्भव ही नही जिसके साथ जीवन का सबसे खूबसूरत लम्हा गुजरा हो उसे भूल जाउ। किसी की याद में तड़पना और और किसी को याद करके उसके साथ बितायें लम्हें को हूबहू महसूस करने में बहुत दूरी का अंतर है। मुझे उसकी याद दुःख नही देती, बल्कि गर्व का अनुभव कराती है कि मैं कभी उसके जीवन का हिस्सा था। हा ये अक्सर होता है कि उसके घर के सामने से जब भी गुजरता हु मेरी बाइक की स्पीड स्वतः ही धीरे हो जाती है, और मेरी आँखें उसके छत के बालकनी पर केंद्रित हो जाती है, हालांकि मुझे यह भी पता होता है कि अब वो वहां नही रहती। और कभी मायका घूमने आयी होगी और दिख गयी तो भी उसके माथे पर चमकता हुआ सिंदूर भी होगा, और हो सकता है गोद मे एक उसके जैसे ही सुंदर सी कोई परी या कान्हा होगा, जिसके साथ वो बहुत ही सुंदर और आनंदमयी जिंदगी जी रही होगी।

Tuesday, 24 September 2019

Book review 'Zindagi 50-50' by Suraj jaiswal Kabira (Hindi)

Book review 'Zindagi 50-50'

जिंदगी 50-50 जैसा नाम है पूरा उपन्यास उसी के इर्द- गिर्द घूमता है। मिस्टर तालिब तूफानी जी के सजेशन पर मैंने यह किताब पढ़नी शुरू की।

एक जिंदगी के अंदर कई जिंदगियां जीनी होती है, कई टुकड़ो में बंटकर। वास्तविक जिंदगी कौन सा है हम कभी जान ही नही पातें, और जब तक समझ पाते हैं, शायद देर कर चुके होतें हैं। इस देर हो चुके भूल को सुधारने के लिए दूसरा जन्म मिलता हो या न मिलता हो, पर अगर इसी जन्म के अंदर यदि दूसरा मौका मिलता है तो हमें इसका लाभ अवश्य लेना चाहिए।
Book review 'Zindagi 50-50' by Suraj jaiswal Kabira (Hindi)


हमारी आंखों पर एक चश्मा चढ़ा होता है, जिसमे हम सिर्फ एक अपनी बनाई नजरिये से ही देख पातें हैं। हम अपनी जिंदगी के अलग अलग हिस्से को तो उस चश्में से देख सकतें है पर वह चश्मा हमें दूसरें की जिंदगी के पहलुओं को दिखाने में असमर्थ होती है। हम भूल जातें हैं कि दूसरे की जिंदगी भी कई पहलुओं। के बटी होगी, उसकी जिंदगी भी हो सकती है 50-50.

उपन्यास की कहानी आपकी जिंदगी में आयी कहानियों में सबसे अच्छी कहानियों की सूची में जगह बनाने में अवश्य सफल हो सकती है, यदि आप अनमोल भागवत जी के नजरिये से देख सके, ऐसा मेरा मानना है। इसको आप ना सिर्फ अपनी जिंदगी से बल्कि अपने आस पास दिख रहे लोगो के जिंदगी से भी जुड़ा हुआ महसूस कर सकेंगें।

यह उपन्यास आपको एक अवश्य पढ़नी चाहिए, पर धैर्य के साथ। धैर्य इसलिए क्योकि उपन्यास के शुरुआती 80 पेजेज आपके लिए उबाऊ हो सकतें हैं क्योंकि इसमें संवाद से ज्यादा किरदारों के मन में उठने वाले विचारो को महत्व दिया गया है। हो सकता है यह जरूरी भी हो पर मेरा मानना है कि जरूरत से ज्यादा किरदारो के मन के विचार डालना किसी संस्कारी फेसबुकिये के वाल पर सुविचार पढ़ने जैसा है। अंततः यही कहना चाहूंगा कि यह किताब आपको अवश्य पढ़नी चाहिए, चाहे आप किसी मिडल क्लास फैमिली से सम्बन्ध रखतें हो या किसी राजवाड़े के महलों में निवास करतें हो।

-सूरज जायसवाल 'कबीरा'

Saturday, 14 September 2019

Book Review- Revolution 2020 - Chetan Bhagat by Suraj jaiswal Kabira (Hindi)


Book Review- Revolution 2020(Chetan Bhagat) by Suraj jaiswal Kabira (Hindi)


पिछले दशकों में बॉलीवुड की काल्पनिक फिल्मों ने हमे एक हैप्पी एंडिंग की आदत लगा दी है और वैसे भी इन फिल्मों की एंडिंग हैप्पी क्यो ही ना हो! कौन सा फ़िल्म निर्माता यह चाहेगा कि उसकी फ़िल्म देखने  के बाद लोग सिनेमा हॉल से मुह लटका के निकले?
पर दर्शकों और पाठकों के बीच एक बड़ा तबका भी रहता है जो यह जानता है कि हर कहानी का happy ending सम्भव नही। ये  वो तबका है जो वास्तविकता को पढ़ना और देखना पसन्द करता है।
Review Revolution 2020


ऐसे ही एक उपन्यास आयी थी 2011 में। यह चेतन भगत को पसंद करने वाले पाठकों के अलावा उन पाठकों का भी ध्यान खींचा जो वास्तविकता को पढ़ना पंसद करते है, जिन्हें अच्छी तरह पता है हर कहानी के अंत मे हीरो की लाइफ सेट नही हो जाती है।

कहानी की शुरुआत में ये दूसरी बॉलीवुड की प्रेमकहानियो की तरह प्रतीत होती है जिसमे लाज़िमी है बोरियत महसूस होगी। पर यह दूसरी प्रेम कहानियों की तरह दो प्रेमियों या दो प्रेमियों और चाँद विलेन के जैसी कहानी नही है। यह एक friendzoned हो चुके एक आशिक़ की कहानी है। इस कहानी के तीनों मुख्य किरदार परस्पर विरोधी भूमिका में रहते हुए भी आपकी पूरी सहानुभूति के हकदार होंगे।
Review रेवोल्यूशन 2020


गोपाल अपनी JEE क्लियर ना कर पाने के कारण वाराणसी छोड़ के कोटा जाता है। और वाराणसी में छोड़ जाता है अपने बीमार पिता और और अपनी 8 साल पुरानी दोस्त आरती को जो उसका एकतरफा प्यार भी है, जिसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार था।

एक आरती से दूर जाने का ग़म यू भी छोटा था तब तक जब तक कि उसे ये पता चला कि गोपाल का बचपन का दोस्त राघव 'जो IIT BHU में एडमिशन पाने में सफल हुआ था' और आरती एक दूसरे के साथ relationship स्थापित कर चुके थे।

आरती जिसको पाना गोपाल की जिंदगी का एक मात्र मक़सद था को खोने का बाद गोपाल की जिंदगी बदलने लगी थी। वो एक भरस्टाचारी विधायक के संपर्क में आता है और उसके सहारे अब एक इंजीनियर कॉलेज का डायरेक्टर और मालिक बन चुका था। वो पर्याप्त अमीर बन चुका था। अब वो अपने प्यार जो कि इसका एक मात्र मक़सद था को लगभग पा चुका था। और उसे पाने से रोक पाना अभी किसी के लिए संभव नही था, परिस्थियों भी नही। स्वयं आरती भी अब गोपाल को खोना नही चाहती थी।

पर कुछ ऐसा हुआ जिसने गोपाल की जिंदगी एक बार फिर बदल के रख दी। करप्शन के दम पर अमीर बना गोपाल ने ऐसा त्याग किया जिससे सभी प्यार करने वाले पाठकों की आंखे गीली कर सकती है यदि वो भावुक इंसान हो तो। गोपाल ने स्वयं ही अपने जिंदगी से अपनी सबसे बड़ी मक़सद को स्वयं छीन लिया। ऐसा त्याग भी उसने अपने सबसे बड़े दुश्मन जो कि उसका बचपन का दोस्त भी था के लिए किया था, और किसी को खबर भी नही।

अपना सब कुछ खोने के बाद भी गोपाल अमीर था और उसे रोकने वाला कोई नही था, फिर भी भरस्टाचारी गोपाल हीरो है कहानी का जिसकी जिंदगी से आप स्वयं की जिंदगी जरूर जोड़ के देखेंगे। 

यदि आप एक love story पढ़ना चाहते है पर थोड़ा अलग हटके, एक I love you as a friend टाइप का कुछ तो Revolution 2020 आपके लिए ही लिखा गया है। corrupted होते हुए भी गोपाल आपकी सहानुभूति का केंद्र बनेगा।

Wednesday, 11 September 2019

Suraj jaiswal kabira birthday

Suraj jaiswal kabira birthday

24- 09- 1997
Day- 24
Month- september
Year- 1997

विक्रम संवत 2054
भद्रमाद मास
शुक्ल पक्ष चतुर्दशी

Thursday, 18 April 2019

Earth Day-2019 (Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira

Earth Day-2019 (Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira

प्रकृति का पृथ्वी को यह एक उपहार ही है जहा अनगिनत प्रजातियां  पायी जाती हैं, जिनमे हम बहुतों को जानतें हैं तो बहुतो को जानना बाकी भी है. पर यह एक दुर्भाग्य ही कहेंगे कि जहा सभी प्रजातियां प्रकृति के संतुलन को बनाये रखने के  लिए जिम्मेदार है वही मानव की गतिविधिया इन सबको असंतुलित बनाने में लगी है।  परिणामस्वरूप दुनिया में कई जीवो के खोने के सबसे बड़े दर का सामना करना पड़ रहा है। 60 मिलियन वर्ष पहले डायनासोर विलुप्त हो गए  पर इसके विपरीत अब प्रजातियों के खोने का मुख्य कारण मानव गतिविधिया ही है।  


Earth Day-2019 (Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira
ऐसा वैश्विक विनाश और वन्यजीवों और पौधों के लगातार कमी होने का कारण सीधा मानव गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। जंगलो की कटाई, जलवायु परिवर्तन, कृषि में कीटनाशकों का प्रयोग, तस्करी और अवैध शिकार इत्यादि मुख्य गतिविधियां इसकी जिम्मेदार है। इन गतिविधियों के परिणाम वैश्विक स्तर पर फैल रहे है।

यदि हम अपने गतिविधियों को रोकने के लिए अब भी कोई बड़ा कार्य नही करते है तो यह विलुप्त होने जैसे परिणाम मानव की कभी ना खत्म हिने वाली विरासत बन जाएगी। 

सभी जीवित जीवों का एक मूल्य होता है और प्रत्येक जीव जीवन के जटिलता में एक भूमिका अदा करतें हैं। हम विलुप्तप्राय जीवो को बचाने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा।

अच्छी खबर यह है कि अभी भी विलुप्त होने की दर को धीमा किया जा सकता है इसके लिए सभी को जिम्मेदारी के साथ तुरन्त ही इस दिशा में कार्य करना होगा।
Earth Day-2019 (Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira

Earth day network 2019 के गोल-
- प्रजातियों के विलुप्त होने के दर, इसके कारण, इसके परिणाम और इसके समाधान के सम्बंध में लोगो को जागरूक करना।
-एक वैश्विक आंदोलन का गठन करना, और प्रकृति और उसके मूल्यों को गले लगाना।
- शाकाहार की ओर रुख करना और कीटनाशक के उपयोग को रोकने जैसे व्यक्तिगत कार्यो को प्रोत्साहित करना।

स्रोत-Earth Day 2019 के बारे में और पढ़ने के लिए विजिट करें https://www.earthday.org/campaigns/endangered-species/earthday2019/
                                                                                   - सूरज जायसवाल कबीरा 

Sunday, 31 March 2019

काँच की दुनिया - सूरज जायसवाल कबीरा

काँच की दुनिया

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बचपन में हिंदी के किताब में पढ़ा था कि ये दुनिया काँच के समान है । जैसा हम इस दुनिया से व्यवहार करेंगें वही व्यवहार हम भी पायेंगें । यदि हम किसी से कटुता घृणात्मक व्यौहार करेंगे तो वो भी हमारें साथ वैसा ही व्यौहार करेगा ।

लेखक ने बाकयदा एक काँच के महल का उदाहरण भी पेश किया था । हुआ ऐसा कि एक दिन एक भटकता हुआ कुत्ता उस कांच के महल में घुस आया । अपने आस पास लगें काँच में उसे अपनी प्रतिविम्ब दिखाई दी । उसे लगा उसके आस पास बहुत ढेर सारे कुत्तें है ।इतने कुत्तें देख वो खिसिया गया और भौकने लगा । जब वो भौका तो उसके प्रतिबिम्ब भी भौकें । अब वो और खिसिया गया । काँच के दीवालों पे कूदने लगा उन कुत्तों को काटने के लिए पर वो तो प्रतिविम्ब थी । थोड़ी देर में वो बेहोश हो गया भौकते भौकते ।
काँच की दुनिया

 
उसी महल में थोड़ी देर बाद एक और कुत्ता आया । उसे भी अपने आस पास ढेर सारें कुत्तें दिखें । पर वो खिसिया नही बल्कि दुम हिलाने लगा । सभी प्रतिविम्ब ने भी वही प्रतिक्रिया दी । सब दुम हिलाने लगें । कुत्तें को ये पसन्द आया और वो उनके साथ खेलने लगा । और बाद में ख़ुशी ख़ुशी लौट गया ।

लेखक ने एक काँच के महल को उदाहरण बना कर समझें कि पूरी दुनिया को ही परिभाषित कर दिया । पर ऐसा कुछ नही हुआ । अगर दुनिया ऐसे एक महल को उदाहरण दे देने से काँच की हो जाती तो दुनिया से दुःख नाम का शब्द ही मिट जाता । लोग अच्छी प्रतिक्रिया पाने के लिए अच्छा करतें । किसी के साथ कोई बुरा नही होता ।

मै बताता हूं उसके बाद क्या हुआ होगा जब वो कुत्ता बाहर गया होगा ?

जैसे ही कुत्ता महल के दरवाजे से निकला महल के मालिक की नजर उसपे पड़ी । गुस्से में उस कुत्तें के ऊपर एक बड़ा सा पत्थर फेका । इससे कुत्ते का एक पैर फ्रेक्चर होगया । फिर भी वो भागा और वो आदमी दौड़ाता रहा । तब तक सड़क पे घूम रहे कुछ आवारा लड़को की नजर उस पे पड़ी । वो सब भी कुत्तें को दौड़ाने लगें । मालिक ने कहा कि गाँव से बाहर फेक आओ इस कुत्तें को और वो लौट गया अपने महल । आवारा लड़को की तो मौज हो गयी । ईंट पत्थर मार मार भगा आये उसे गाँव से दूर किसी और गाँव में और लौट गए ।

कुत्तें ने चैन की साँस ली और अपने घावों को चाटने लगा । तभी उसे कुछ कुत्तों के भौकने की आवाज सुनाई दी । उसने देखा कुछ कुत्तें तेजी से भौकते हुए उसकी और चलें आ रहें है । वो पहले तो डर गया पर उसे महल वाली बात याद आयी कि कैसे उसने दुम हिलाया था तो सब दुम हिलाने लगें थे । वो दुम हिलाने लगा । पर ये क्या उसके दुम हिलाने के बावजूद भी सब अभी भी उसकी ओर भौकते चलें आ रहे थे । वो कुत्ता कुछ समझ पाता उससे पहले सभी कुत्ते उस आधे ज़ख़्मी कुत्तें पर झपट पड़े । उसके मांस के चिथड़े करने लगे । वो कुत्ता चिल्लाता रहा । जान बखसने की दुहाई देता रहा । पर वो कुत्तें उसकी एक ना सुनें और उसके अंगों को नोचतें रहें । और नोचतें रहे । एक एक अंग उसके चिथड़े चिथड़े कर दिए जब तक की उसके प्राण पखेरू ना उड़ गए...
ये थी उस कुत्तें की कहानी जो हर जगह प्यार पाने के लिए सबसे प्यार करना चाहता था । उसके अगले एपिसोड में पढ़े उस कुत्तें के साथ क्या हुआ जो महल  में बेहोश पड़ा था ।
©कबीरा

Thursday, 7 March 2019

International women's day! - Suraj Jaiswal kabira

International_women's_day!
मुख्यतः तीन तरह की महिलाएं अभी देश मे मौजूद है । 

1- ऐसी महिलाये जो आज भी जानवरो की तरह जिंदगी जीती है । जिन्हें सामाजिक और कुछ धार्मिक भी नियमो बंधनो में बांध कर उन्हें बस्तुओं की तरह प्रयोग किया जाता है । आज भी उन्हें बुरखे से निकलने की आज़ादी नही, घूंघट हटाने की आज़ादी नही ।


2- क्योकि कुछ समाज मे औरतें बहुत उपेक्षित थी तो कुछ समझदार पुरुषों ने और बहादुर महिलाओं ने मिल कर इनके हक़ के लिए लड़ाई लड़े । शहीद भी हुए, सफल भी हुए । ये वीरांगनायें विज्ञान के क्षेत्र में, खेल के क्षेत्र में , संगीत के क्षेत्र में और भी अनेको अच्छे क्षेत्र में पुरुषों से सिर्फ कंधा ही नही मिलाया, बल्कि उनसे आगे भी निकली । हम इनके ज़ज़्बे को सलाम करते है।

3- और अब आती हैं , इस लिस्ट की सबसे खास महिलायें(?)। इन्हें आम तौर पर आज कल की  फेमिनिस्ट महिला कहा जाता है । इन्होंने ने भी महिलाओं के हक़ की लड़ाई लड़ी पर सामाजिक बुराइयों से नही, बल्कि उन बुराइयों को अपनाने के लिए पुरुषों से लड़ी ।
InteranIntern women's day! Feminist

जो हक़ इनको मिला था, कल्पना चावला बनने के लिए, जो हक़ इनको मिला था लता मंगेश्कर बनने के लिए, जो हक़ इनको मिला था जानवर की जिंदगी से उठकर इंसान बनने के लिए उस हक़ इन्होंने हर प्रकार से प्रयोग किया , खुले में सिगरेट पीने के लिए, बिना टी शर्ट-ब्रा के सड़क पर घूमने के लिए और सोशल साइट पर 'All men are Dog' लिखने के लिए ।
 आम तौर पर ये महिलाएं सिर्फ अंग्रेजी में बात करती हुई मिलेंगीं । और इनकी सबसे बड़ी पहचान ये होती है कि ये सोशल मीडिया पर ये कहती हुई मिल जाएंगी  'All men are Dog.'  इनकी नज़र में हर पुरुष बलात्कारी होता है।  इनकी आखिरी और पहली ख़्वाशिस होती है, ' धरती से पुरुष विलुप्त हो जाये।' 

बस कबीरा मान जा

-कबीरा

Sunday, 23 December 2018

Love is the availability to make people fool? - suraj k jaiswal kabira

Love is the availability to make people fool? - suraj k jaiswal kabira

ऐसे ही facebook scroll करते वक्त एक पोस्ट पर नजर पड़ी ‘ मुहब्बत मूर्ख बनाने की योग्यता का नाम है ‘

पहले तो अनायास ही हँसी आगयी उसे पढ़ कर पर जिसने लिखा था, उसकी बात अनायास नही हो सकती
Love is the availability to make people fool? Suraj k jaiswal kabira
मूर्ख बनाने की योग्यता। यह योग्यता भी कमाल की है ना, मुहब्बत जब अपनो से हो मूर्ख बन के ही हर लम्हा सवंर जाता है पर जब किसी अजनबी से मुहब्बत हो जाये तो.. कुछ भी हो सकता है ।


मूर्ख बनने की असली योग्यता तो अजनबी से मुहब्बत करने पर ही मिलती है । ऐसे शख्स के लिए लिखना और लिखते रहना, ऐसे शख्स के लिए सोचना और सोचते रहना, जिसके बारे में अभी हम यह नही जान पाए कि वो उसके ज़ज़्बात क्या है मेरे लिए…. पर सुकून बहुत है इसमें… चैन नही मिलता वो अलग बात है…

-कबीरा


मेरी डायरी और तुम - सूरज जायसवाल 'कबीरा'

मेरी डायरी और तुम
मेरी डायरी
मेरी डायरी और तुम
.....खैर अपनी बात अपनी डायरी को भी नही बताऊ तो किसे बताऊंगा। मेरी डायरी ही तो है जो हर रात को मेरे सारे अच्छे बुरे अनुभव खुद में सहेज लेती है। अच्छी बात ये है कि उसे मैं अपनी भाषा मे सब कुछ कह पाता हूं, कभी आज तक उसने ये नही कहा 'what the meaning of that lines? '

मैं सोच रहा था कि किसी दिन डायरी ने भी मेरी हिंदी समझने से इनकार कर दिया और तुम्हारी तरह वो भी कह उठे ' please tell me the meaning of your writing' उस दिन तो डायरी के उन कोरे पन्नो में भी वो अपनापन तलाशने में असफल हो जाऊंगा जैसे तुम्हारे दिल के किसी कोने में अपनी जगह तलाशने में हर बार असफल हो जाता हूं ।

पता है डायरी के किसी भी पन्ने में दिल नही है, पर उनसे मैं सिर्फ अपनी दिल की बातें ही share करता हु . वो क्या है कि दिमाग की तो पूरी दुनिया सुनती है, पर जब उन्हें अपने दिल की बात सुनाने जाओ तो हँसतें है सब। हा सच मे सब हँसतें है यार। तुम भी तो हँसती हो । क्या नही हँसती हो ? जब भी अपने दिल की बात तुम्हें बताने की सोचता हूं तुम्हे लगता है मैं मज़ाक कर रहा हु। तुम भी हँसती हो।

डायरी के पन्ने दिल नही रखते पर सब ज़ज़्बात सहेजतें है । और एक तुम हो, जो आजतक यह नही समझ पायी कि मैं तुम्हारे जिंदगी में क्यो हु?

    सच तो ये है कि तुम्हारी जिंदगी में मैं क्यो हु, ये बात तो आजतक मैं भी नही समझ पाया। मेरी सुबह से लेकर शाम तक, शाम से फिर सुबह तक, किसी हिस्से में तुम्हारा कोई वजूद नही । फिर भी जाने क्यों, तुम्हें सोचे बगैर मैं एक पल भी नही । एक पल भी नही... जाने क्यों ? 
- सूरज जायसवाल 'कबीरा'

Thursday, 29 November 2018

राजीव दीक्षित- कितना झूठ, कितना सच- Suraj Jaiswal ' kabira'

आज राजीव दीक्षित जी का जन्म दिन एवं पुण्यतिथि भी है। मेरे मित्रता सूची में बहुत से राजीव दीक्षित के समर्थक है, कभी मैं भी हुआ करता था, पर तब मेरा बचपना था।
rajiv dixit by purple duniya


राजीव दीक्षित जी के व्याख्यान कड़ी तपस्या अर्थात रिसर्च पर आधारित होती है, ऐसा उनके समर्थक कहते हैं। मैं भी कहता था क्योकि सुनने में बहुत अच्छा लगता था, पर जब उनके व्याख्यानों को प्रायोगिक स्तर पर समझने के प्रयास करने लगा तो लगा कि उनके ज्यादातर व्याख्यान आधे अधूरे रिसर्च और भावनाओ में बह के बोले गए होते हैं। 

मैं ऐसे ही नही कह रहा, एक उदाहरण भी दे रहा हु। अगर आप उनके समर्थक रहे है तो आपने उनका सर्पदंश वाला व्याख्यान जरूर सुना होगा, जिसमे वो दावा करतें है कि 'Naja-200' नाम के होमियोपैथीक दवाई से किसी भी साँप के काटें का इलाज हो सकता है। हालांकि इस व्याख्यान में वो और भी बहुत कुछ कोरी बातें करते पर उन सब पे आज बात नही करेंगे हम।

अगर आप पता करने की कोशिश करें तो शायद आपको एक भी इंसान ना मिले जो इस दवाई से सर्पदंश को झेल पाया हो। हा अगर कोई होगा भी तो बिल्कुल उसी सिद्धांत पे बचा होगा जिस पर ढोंगी सोखा/तांत्रिक इत्यादि बचाने का दावा करते हैं। इस दवा के भरोशे किसी की जान तो नही बची पर राजीव दीक्षित पर भरोसा करके बहुत लोगो ने अपनी जानें दे दी होगी। तो अगली बार Naja-200 वाला कोई पोस्ट शेयर करने से बचिए।

मैं राजीव दीक्षित जी का किसी भी तरह से विरोधी नही हु, पर किसी पर भी आंख मूंदकर विश्वास करना आपको आपके जिंदगी से भी दूर कर सकता है। मैं उनके स्वदेशी आंदोलन का आज भी समर्थक हु। कबीरा का नमन है उनको।

Thursday, 12 July 2018

Wildlife Human conflict

Wildlife Human conflict

जब भी इंसान और वन्य जीवों का परस्पर संपर्क बढ़ता है, इसका प्रभाव नकारात्मक ही होता है।
पर यह प्रभाव या संपर्क पैदा कौन करता है?
Animals?
No no, I don't think they would like to interact in fucking human life.
शहरीकरण हम कर रहे, वनीकरण वो नही कर रहे, उल्टा हम उनके वनों को काट के मैदान बना रहे है।
एक नजर wildlife के definition पर भी डालते है👇
'The area under vegetation, which is place for wild species and is not a property of Human.'
दो दिन पहले रायवाला(देहरादून) में एक लेपर्ड(Panthera pardus) को मार दिया गया क्योकि वो आदमखोर हो गया था।

रायवाला जो कि पूरा Rajaji Tiger Reserve के अंदर आता है, वहा एक पूरा शहर बसा हुआ है। यह क्षेत्र कभी पूरा जंगल ही रहा होगा, पर इंसानों की चुलमची ने इसको खोखला करना शुरू किया होगा और रहना भी।
अब कोई तुम्हारे घर मे ही घुसकर तुम्ही पर राज करने लगे तो क्या तुम उसके लिए कोई कदम नही उठाओगे?
पक्का करोगे कुछ ना कुछ, राइट?
ये जो wild animals होतें हैं ना, ये भी यही करते है। ये आदमखोर नही है। अपने आशियाने को बचाने का प्रयास करते है, जो कि हम इंसान बर्बाद करने पर तुले हुए है।

पर हम कहा सुधरने वाले है, जब तक प्रकृति को पूरी तरह नष्ट ना करदे हम कहा ठहरने वाले है।
ये जंगली जानवर एक आदमी मारेंगें तो हम पूरा एक जंगल काट देंगे और पूरी एक wildlife ही खत्म कर देंगे, क्योकि हम इंसान है।
Really?
-कबीरा

Monday, 4 June 2018

World Environment Day- Beat Plastic Pollution (suraj)

World Environment Day- Beat Plastic Pollution





हमारे पास प्लास्टिक के कई मूल्यवान उपयोग मौजूद है पर हम गंभीर पर्यावरणीय परिणामों के साथ एकल उपयोग या डिस्पोजेबल प्लास्टिक के आदी हो गए हैं। दुनिया भर में, हर मिनट एक मिलियन प्लास्टिक पीने की बोतलें खरीदी जाती हैं, जबकि हर साल दुनिया भर में 5 ट्रिलियन एकल उपयोग प्लास्टिक बैग का उपयोग किया जाता है। कुल मिलाकर, उत्पादित सभी प्लास्टिक का आधा केवल एक बार उपयोग किया जाता है - और फिर फेंक दिया जाता है। प्लास्टिक कचरा अब प्राकृतिक पर्यावरण में इतनी सर्वव्यापी है कि वैज्ञानिकों ने यह भी सुझाव दिया है कि यह एंथ्रोपोसिन युग के भूवैज्ञानिक संकेतक के रूप में कार्य कर सकता है।



World Environment Day- Beat Plastic Pollution


कैसे प्लास्टिक हमारे बीच इतना हावी हुआ, इसका एक मोटा अकड़ा-
1950 से लेकर 1970 के दशक तक बहुत कम मात्रा में प्लास्टिक का उत्पादन हुआ था। इतना कम तो था कि उनका समन्वय पर्यावरण के साथ स्थापित किया जा सकता था।
1990 तक, इन दो दशकों में प्लास्टिक प्रदूषण करने वाले पीढ़ी की संख्या तीन गुनी से ज़्यादा हो चुकी थी ।
World Environment Day- Beat Plastic Pollution

आज हम हर साल 300 मिलियन टन प्लास्टिक का उत्पादन करते है जो कि सम्पूर्ण मानव जाति के वजन के बराबर है ।

हम कुछ अन्य चिंताजनक रुझान देख रहे हैं। 1950 के दशक से, प्लास्टिक उत्पादन की दर किसी भी अन्य सामग्री की तुलना में तेज़ी से बढ़ी है। इन दशकों में हमने टिकाउ और मजबूत प्लास्टिक का उत्पादन भी देखा है और ऐसे प्लास्टिक भी जो एक ही उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है।ई

 99% से अधिक प्लास्टिक तेल, प्राकृतिक गैस और कोयला से प्राप्त रसायनों सउत्पादित होते हैं - जिनमें से सभी गंदे, गैर नवीकरणीय संसाधन हैं। यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो 2050 तक प्लास्टिक उद्योग दुनिया की कुल तेल खपत का 20% हिस्सा ले सकता है।

World Environment Day- Beat Plastic Pollution
नदिया प्लास्टिक्स को बहा कर समुन्द्रों में ले जाती है और समुन्द्रों के प्रदूषित होने का एक बहुत बड़ा कारण बनती है ।


अधिकांश प्लास्टिक कभी नष्ट नही होते । वो छोटे और छोटे होते जाते है और फिर खेतों में, या जानवरो और मछलियों द्वारा निगल लिए जाते है जो फिर बाद में हमारे खाने के प्लेट तक पहुच जाते है ।
नालियो में गिरे प्लास्टिक में पानी जम जाता है और फिर कई तरह के वायरस, मच्छरों के प्रजनन का केंद्र बन जाता है, जो बाद में मलेरिया जैसे बीमारियों का कारण बनता है।

एक आंकड़े के अनुसार साल 2050 तक समुद्रों में मछलियों से ज्यादा तो प्लास्टिक हो जाएंगी यदि यही क्रम चलता रहा तो ।


हम क्या कर सकते है ?
ऐसा नही है कि सरकारें इस ओर ध्यान नही दे रही है, वो कई तरह के नियम, योजनाए चला रखी है ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके । पर हमे खुद भी आगे आकर इसके लिए प्रयास करना होगा ।

World Environment Day- Beat Plastic Pollution
बहुत सी चीजें है जो हम अपने लेवल पर कर सकते है जो एकल प्रयोग की प्लास्टिक का प्रयोग कम से कम हो सके।
- हम फ़ूड सप्लायर पर दबाव बना सकते है कि वो प्लाटिक के चीजो में खाने की पैकिंग ना करे।

- हम सुपर मार्केट में अपना बैग ले कर जा सकते है ताकि वहां से पॉलीथिन ना लेना पड़े ।
-हम प्लास्टिक के छोटे छोटे चीजो जैसे चम्मच, स्ट्रा, प्लाटिक के गिलास इत्यादि के प्रयोग को ना कह सकते है ।
-हम अपने साथ ऐसे प्लास्टिक के बॉटल को कैर्री कर सकते है जो बार बार भरा जा सके ।
- हम अपने लोकल ऑथोरिटी से बात कर सकते है कि वो अपने क्षेत्र में एकल प्रयोग के प्लाटिक पर बैन लगाए ।
- हम लोगो स्व व्यक्तिगत तौर पर बात करके इस सम्बंध में जागरूक कर सकते है ।
- सोसल साइट्स पर प्रदूषण पर लेख लिख कर लोगो को जागरूक कर सकते है ।

वैश्वीक स्तर पर चल रहे इस पर्यावरण की लड़ाई में आप भी योद्धा बनिए और प्रकृति एयर पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दे।
स्रोत - UN environment
अनुवाद - Suraj Kumar Jaiswal

Saturday, 21 April 2018

Internet In Mahabharata

Internet In Mahabharata


internet in Mahabharata
●महाभारत काल मे इंटरनेट●
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महाभारत का युद्ध अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। समस्त मैदान युद्ध मे घायल अथवा वीरगति को प्राप्त यौद्धाओं के शारीरिक अवशेषों से पटा हुआ है। दुर्योधन की 11 अक्षोहिणी सेना का समूल नाश हो चुका है और बलवान दुर्योधन अकेला ही गदा को लेकर रक्तरंजित शरीर को लिए सरोवर की ओर भागता चला जा रहा है। पांडवों के पक्ष में 2000 रथ, 700 हाथी, पांच हजार घुड़सवार तथा 10 हजार पैदल सैनिक मात्र बचे हैं। 
internet in Mahabharata


सहसा पांडवों के सेनापति धृष्टधुम्न मैदान में विजयी भाव से खड़े कृष्ण के सेनापति (और महाभारत के एकलौते Undefeated यौद्धा) "सात्यकि" के नजदीक आकर मैदान में बंधनो में जकड़े पड़े "संजय" को देख बोले-"इसका क्या करना है?"
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संजय? होल्ड ऑन... संजय महाभारत के युद्ध मे क्या कर रहा था? संजय का काम तो सॅटॅलाइट टीवी पर देखकर महाभारत का हाल धृतराष्ट्र को सुनाना होता था? 
Right? No... Absolutely Wrong.... 
internet in Mahabharata

वास्तव में... संजय महाभारत का हाल देखकर हर दो-चार दिनों में जाकर धृतराष्ट्र को मुंह से "Past Tense" में सुनाकर आता था। संजय को युद्धक्षेत्र में मुक्त विचरण करने की अनुमति वेदव्यास जी के द्वारा मिली थी। चूंकि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास दोनों पक्षों के लिए पूज्य थे इसलिए उनकी आज्ञा के उल्लंघन का साहस किसी मे नही था। 

परंतु...
युद्ध के अंतिम दिनों में कौरव पक्ष का विध्वंस होते देख संजय की स्वाभाविक स्वामिभक्ति जोर मार गई और उसने दुर्योधन के पक्ष में तलवार उठा ली और इस कारण पांडवों ने उसे बंदी बना लिया। 
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शल्य पर्व के अंतर्गत हृदप्रवेश पर्व में यह वर्णन आता है कि सात्यकि अंततः संजय के वध का निर्णय ले लेते हैं लेकिन ऐन मौके पर एक बार फिर वेदव्यास आ कर संजय को अभयदान देते हैं। 
इस प्रकार संजय बच निकलता है और सरोवर के नजदीक लहुलुहान हालत में मौजूद दुर्योधन से संवाद करते हुए अंततः हस्तिनापुर पहुंचता है। संजय को कोई दिव्यदृष्टि भी प्राप्त हुई थी, ऐसा कोई वर्णन महाभारत में है ही नही।
भारतीय इतिहास का सम्यक और मानवीय अध्ययन करना है तो मूल ग्रंथों को पढिये। 
जिनके ज्ञान का स्त्रोत "बीआर चोपड़ा की महाभारत" हो उन्हें महाभारत काल मे इंटरनेट के मुगालते हो आना सामान्य बात है।
मूल ग्रंथों को पढिये। अपनी संस्कृति और प्रतीकों के सम्मान के लिए अनगिनत वाजिब वजहें जरूर मिल जाएंगी। 
-विजय सिंह ठाकुराय जी के वाल से

Wednesday, 28 March 2018

भोजन समय से नहीं कर सकते तो

भोजन समय से नहीं कर सकते तो
लोगो की दिनचर्या बहुत व्यस्तता भरी होती जारही ही | रोज की वही भागा दौड़ी में हम कही भूल जाते है कि इन सबके बीच हमारे सेहत की वाट लगी पड़ी है | खासतौर पर उन लोगो की सेहत में ज्यदा असर हो रहा है जो घर से दूर रहते है , कोई पढाई के लिए कोई नौकरी के लिए | ऐसे में होता ये है की हम खाने पर कम ध्यान दे पाते है, खासतौर पर जब खाना खुद बनाना होता है | पर यहा कुछ टिप्स है जिन्हें आप फॉलो करके कई तरह की बीमारियों से बच सकते है |

भोजन समय से नहीं कर सकते तो एक बात मान लो दिन भर में 10 - 12 ग्लॉस पानी ही लगभग हर घण्टे में 1 ग्लॉस पीते रहा करो ।

ऐसा करने से कम से कम ...

डिहाइड्रेशन तो नहीं होगा ।

चक्कर तो नहीं आयेंगे ।

उल्टी , दस्त से तो बचोगे ।
बार - बार ज़ुकाम और बुखार तो नहीं होगा ।
चेहरे पर झाइयां और फुंसियां तो नहीं होंगी ।
यूरिन और किडनी सम्बंधी बीमारियों से तो बचना होगा ।
...
थोड़ा और कुछ कर सको तो...
सुबह बस 30 मिनट का योगाभ्यास कर लो ,
15 मिनट प्राण साधना कर लो और 15 मिनट ध्यान कर लो ।
देख लेना कार्य करने की क्षमता और गुणवत्ता में वृद्धि हो जायेगी ।
भले ही फ़ील्ड वर्क है पर जितने परिश्रम से अभी जितना आउटपुट मिलता है ..
अपने दैनिक जीवन में इतना जोड़ लेने भर से ..इतने परिश्रम में ही परिणाम और बेहतर हो जायेंगे ।
..
जानता हूँ धन बहुत आवश्यक है , कैरियर बनाना है , भविष्य उज्जवल करना है ..लेकिन क्या स्वास्थ्य की कीमत पर ऐसा करना उचित होगा ?
  1. छोटी सी बात है ...एकबार करके देख लो ..शायद बार - बार बीमार पड़ना बन्द हो जाये ।

Saturday, 24 March 2018

voyager वायेजर - मानव की लम्बी छलांग

voyager वायेजर - मानव की लम्बी छलांग

voyager वायेजर - मानव की लम्बी छलांग
खोज करना मानव की फ़ितरत है। इसके लिए वो किसी भी हद तक जाने को तैयार होता है। तभी तो, मानव उस चीज़ को खोजने में जुटा हुआ है, जिसकी कोई हद नहीं। जिसका कोई ओर-छोर नहीं।

पर, वो आख़िर क्या है जिसका कोई ओर-छोर नहीं और हम जिसकी खोज में जुटे हुए हैं। वो है हमारा ब्रह्मांड।

इस में कितनी आकाशगंगाएं हैं?

कितने सितारे हैं?
कितने ग्रह और उपग्रह हैं?
इसमें से किसी भी सवाल का जवाब हमें नहीं मालूम। मगर हम ब्रह्मांड का ओर-छोर, इसके राज़ तलाशने में जुटे हैं।
मानव की खोजी फ़ितरत ने ही जन्म दिया है दुनिया के सबसे महान अंतरिक्ष अभियान को। इस महानअंतरिक्ष अभियान का नाम है-वायेजर

बात आज से 40 साल पहले की है। 1977 में अगस्त और सितंबर महीने में अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दो अंतरिक्ष यान धरती से रवाना किए थे। इन्हीं का नाम था वायेजर एक और दो। वायेजर 2 को 20 अगस्त को अमरीकी अंतरिक्ष सेंटर केप कनावरल से छोड़ा गया था। वहीं वायेजर एक को पांच सितंबर को रवाना किया गया। आज से 40 बरस बाद ये दोनों अंतरिक्ष यान धरती से अरबों किलोमीटर की दूरी पर हैं। वायेजर एक तो अब हमारे सौर मंडल से भी दूर यानी क़रीब 20 अरब किलोमीटर दूर जा चुका है। वही वायेजर दो ने दूसरा रास्ता लेते करते हुए क़रीब 17 अरब किलोमीटर का सफ़र तय कर लिया है।

ये दूरी इतनी है कि वायेजर एक से धरती पर संदेश आने जाने में क़रीब 38 घंटे लगते हैं। वो भी तब जब ये रेडियो संकेत, 1 सेकेंड में तीन लाख किलोमीटर की दूरी तय करते हैं, यानी प्रकाश की गति से चलते हैं। वहीं वायेजर 2 से धरती तक संदेश आने में 30 घंटे लगते हैं। सबसे दिलचस्प बात ये है कि आज 40 साल बाद भी दोनों यान काम कर रहे हैं और मानवियत तक ब्रह्मांड के तमाम राज़ पहुंचा रहे हैं। हां, अब ये बूढ़े हो चले हैं। इनकी काम करने की ताक़त कमज़ोर हो गई है। इनकी तकनीक भी पुरानी पड़ चुकी है। आज, वायेजर यानों से आने वाले संदेश पकड़ने के लिए नासा ने पूरी दुनिया में रेडियो संकेत सेंटर बनाए हैं।

ये बात कुछ वैसी ही है जैसे आप शहर से बाहर जाएं तो आपको मोबाइल का संकेत पाने में मशक़्क़त करनी पड़े। ठीक इसी तरह आज नासा, दुनिया भर में बड़ी-बड़ी सैटेलाइट डिश लगाकर वायेजर से आने वाले संकेत पकड़ता है।

इस अभियान से शुरुआत से जुड़े हुए वैज्ञानिक एड स्टोन कहते हैं कि आज वायेजर एक ब्रह्मांड में इतनी दूर है, जहां शून्य, अंधेरे और सर्द माहौल के सिवा कुछ भी नहीं। वो बताते हैं कि वायेजर अभियान के डिज़ाइन पर 1972 में काम शुरू हुआ था।

आज 40 साल बाद वायेजर अभियान से हमें ब्रह्मांड के बहुत से राज़ पता चले हैं। बृहस्पति, शनि, युरेनस और नेपच्युन ग्रहों के बारे में तमाम दिलचस्प जानकारियां मिली हैं। इन विशाल ग्रहों के चंद्रमा के बारे में तमाम जानकारियां वायेजर अभियान के ज़रिए मिली हैं।
Carl Sagan
वायेजर अभियान से जुड़े एक और व्यक्ति थे वैज्ञानिक कार्ल सगन। सगन ने वायेजर यानों से ग्रामोफ़ोन जोड़ने के प्रोजेक्ट पर काम किया था। वो पहले अमरीका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोफिजिक्स पढ़ाया करते थे। बाद में सगन नासा के लिए काम करने लगे। वो मंगल ग्रह पर जाने वाले पहले अभियान वाइकिंग का भी हिस्सा थे। उन्होंने बच्चों के लिए विज्ञान की कई दिलचस्प क़िताबें लिखीं। कई रेडियो और टीवी कार्यक्रमों में भी भागीदारी की।

वायेजर यानों में ग्रामोफ़ोन लगाने का उद्देश्य एक आशा थी। आशा ये कि धरती के अलावा भी ब्रह्मांड में कहीं जीवन अवश्य है। यात्रा करते-करते जब किसी और सभ्यता को हमारा वायेजर मिले, तो उसे मानवी सभ्यता की एक झलक इन ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड के ज़रिए मिले। यानी वायेजर सिर्फ़ एक अंतरिक्ष अभियान नहीं, बल्कि सुदूर ब्रह्मांड को भेजा गया मानवता का संदेश भी हैं। ये ग्रामोफ़ोन तांबे के डिस्क से बने हैं, जो क़रीब एक अरब साल तक सही सलामत रहेंगे। इस दौरान जो अगर वायेजर किसी ऐसी सभ्यता के हाथ लग गया जो ब्रह्मांड में कहीं बसती है, तो, इन ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड के ज़रिए उन्हें मानवता के होने का, उसकी प्रगति का संदेश मिलेगा।

नासा के सीनियर वैज्ञानिक एड स्टोन बताते हैं कि वायेजर यानों को साल 1977 में रवाना करने की भी एक वजह थी। उस साल सौर मंडल के ग्रहों की कुछ ऐसी स्थिति थी, कि ये यान सभी बड़े ग्रहों यानी बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून से होकर गुज़रते। इस अभियान पर काम करने वाली लिंडा स्पिलकर बताती हैं कि ग्रहों की स्थिति की वजह से उस दौरान नासा में काम कर रहे कई लोगों के बच्चे हुए थे। आज इन्हें वायेजर पीढ़ी के बच्चे कहा जाता है।

लॉन्च के 18 महीने बाद यानी 1979 में वायेजर 1 और 2 ने बृहस्पति यानी जुपिटर ग्रह की खोज शुरू की। दोनों अंतरिक्ष यान ने सौर मंडल के इस सबसे बड़े ग्रह की बेहद साफ़ और दिलचस्प तस्वीरें भेजीं।

वायेजर अभियान से जुड़े इकलौते ब्रिटिश वैज्ञानिक गैरी हंट बताते हैं कि वायेजर यानों से आने वाली हर तस्वीर जानकारी की नई परत खोलती थी।

वायेजर अभियान से पहले हमें यही पता था कि सौर मंडल में सिर्फ़ धरती पर ही ज्वालामुखी पाए जाते हैं। लेकिन वायेजर से पता चला कि बृहस्पति के एक चंद्रमा पर भी ज्वालामुखी हैं। एड स्टोन कहते हैं कि वायेजर अभियान ने सौर मंडल को लेकर हमारे तमाम ख़याल ग़लत साबित कर दिए। जैसे हमें पहले ये लगता था कि सागर सिर्फ़ धरती पर हैं। मगर, वायेजर से आई तस्वीरों से पता चला कि बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा पर भी सागर हैं।

आज की दिनांक में वायेजर अभियान की वास्तविक तस्वीरों को लंदन के क्वीन मैरी कॉलेज की लाइब्रेरी में रखा गया है। क्योंकि नासा ने इन तस्वीरों की डिजिटल कॉपी बना ली हैं।

गैरी हंट बताते हैं कि जब वायेजर 1 ने शनि के चंद्रमा मिमास की तस्वीरें भेजी थीं, तो उन्हें देखकर सभी लोग हैरान रह गए थे। वो दौर स्टार वार्स फ़िल्मों का था। इसलिए वैज्ञानिकों ने मिमास को ‘डेथ स्टार’ का फ़िल्मी नाम दिया था। वायेजर ने तस्वीरों के ज़रिए हमें शनि के वलयों के नए रहस्य बताए थे। इस अभियान से पता चला था कि शनि के उपग्रह टाइटन पर बड़ी तादाद में पेट्रोकेमिकल हैं। और यहां मीथेन गैस की बारिश होती है।

वायेजर अभियान के ज़रिए हमें शनि के छोटे से चंद्रमा एनसेलाडस का पता चला था। बात में कैसिनी-ह्यूजेंस अभियान के ज़रिए भी इसके बारे में कई जानकारियां मिली थीं। आज सौर मंडल में जीवन की के सबसे अधिक संभावना, शनि के चंद्रमा एनसेलाडस पर ही दिखती हैं।
वैज्ञानी एमिली लकड़ावाला कहती हैं कि शनि का हर चंद्रमा अपने आप में अलग है। एमिली के मुताबिक़ वायेजर के ज़रिए हमें ये एहसास हुआ कि शनि के तमाम चंद्रमाओं की पड़ताल के लिए हमें नए अभियान भेजने की ज़रूरत है। नवंबर 1980 में वायेजर 1 ने शनि से आगे का सफ़र शुरू किया। नौ महीने बाद वायेजर 2 ने सौर मंडल के दूर के ग्रहों का मार्ग लिया। वो 1986 में यूरेनस ग्रह के क़रीब पहुंचा। वायेजर 2 ने हमें बताया कि ये ग्रह गैस से बना हुआ है और इसके 10 उपग्रह हैं।

1989 में वायेजर 2 नेपच्यून ग्रह के क़रीब पहुंचा, तो हमें पता चला कि इस के चंद्रमा तो बेहद दिलचस्प हैं। ट्राइटन नाम के चंद्रमा पर नाइट्रोजन के गीज़र देखने को मिले। सौर मंडल के लंबी यात्रा में वायेजर 1 और 2 ने मानव को तमाम जानकारियों से सराबोर किया है। हमें पता चला है कि धरती पर होने वाली कई गतिविधियां सौर मंडल के दूसरे ग्रहों पर भी होती हैं।

वायेजर की खोज की बुनियाद पर ही बाद में कई और अंतरिक्ष अभियान शुरू किए गए। जैसे शनि के लिए कैसिनी-ह्यूजेंस अभियान अंतरिक्ष यान भेजा गया। बृहस्पति ग्रह के लिए गैलीलियो और जूनो यान भेजे गए। अब कई और अभियान सुदूर अंतरिक्ष भेजे जाने की योजना है। हालांकि फिलहाल यूरेनस और नेपच्यून ग्रहों के लिए किसी नए अभियान की योजना नहीं है। तब तक हमें वायेजर से मिली जानकारी से ही काम चलाना होगा।

मानव के इतिहास में ऐसे गिने-चुने अभियान ही हुए होंगे, जिनसे इतनी जानकारियां हासिल हुईं। आज चालीस साल बाद तकनीक ने काफ़ी तरक़्क़ी कर ली है। ऐसे में वायेजर यान पुराने पड़ चुके हैं।

वायेजर विश्व के पहले ऐसे अंतरिक्ष अभियान थे जिनका नियंत्रण कंप्यूटर के हाथ में था। आज चालीस वर्ष बाद भी ये दोनों ही यान ख़ुद से अपना सफर तय करते हैं। अपनी पड़ताल करते हैं और ज़रूरत पड़ने पर अपना बैकअप सिस्टम चालू करते हैं।वायेजर को बनाने में इस्तेमाल हुई कई तकनीक हम आज भी इस्तेमाल करते हैं। आज के मोबाइल फ़ोन और सीडी प्लेयर वायेजर में इस्तेमाल हुई कोडिंग सिस्टम तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। आज के स्मार्टफ़ोन में तस्वीरें प्रोसेस करने की जो तकनीक है, वो वायेजर के विकास के दौरान ही खोजी गई थी।

voyger
वायेजर अभियान का सबसे महान क्षण उस वक़्त आया था, जब 14 फरवरी 1990 को इसने अपने कैमरे धरती की तरफ़ घुमाए थे। उस दौरान पूरे सौर मंडल और ब्रह्मांड में धरती सिर्फ़ एक छोटी सी नीली प्रकाश जैसी दिखी थी। एमिली लकड़ावाला कहती हैं कि पूरे ब्रह्मांड में ये एक छोटी सी नीले रंग की टिमटिमाहट ही वो जगह है, जहां हम जानते हैं कि जीवन मौजूद है। वो कहती हैं कि किसी भी खगोलीय घटना से धरती पर से जीवन समाप्त हो सकता है। ऐसे में वायेजर के ज़रिए ही हमारी सभ्यता की निशानियां सुदूर ब्रह्मांड में बची रहेंगी।

2013 में वायेजर 1 अंतरिक्ष यान सौरमंडल से दूर निकल गया। आज वो अंतरिक्ष में घूम रहा है। अभी भी जानकारियां भेज रहा है। जल्द ही वायेजर 2 भी सौरमंडल से बाहर चला जाएगा।

दोनों ही अंतरिक्ष यान में आण्विक बैटरियां लगी हैं। जल्द ही इनसे विद्युत बनना बंद हो जाएगी। हर साल इनसे चार वाट कम बिजली बनती है। वायेजर के प्रोग्राम मैनेजर सूज़ी डॉड कहते हैं कि हमें बहुत सावधानी से वायेजर अभियान को जारी रखना है। इसके पुराने पड़ चुके यंत्र बंद किए जा रहे हैं। दोनों के कैमरे बंद किए जा चुके हैं। क्योंकि अंतरिक्ष में घुप्प अंधेरा है। देखने के लिए कुछ भी नहीं है। विद्युत बचाकर वायेजर को सर्द अंतरिक्ष मे गर्म बनाए रखा जा रहा है। सूज़ी डॉड कहते हैं कि अगले दस वर्षो में दोनों को पूरी तरह से बंद करना होगा। ये पूरी मानवता के लिए बहुत दुखद दिन होगा। हालांकि तब तक दोनों ने अपनी बेहद दिलचस्प ज़िंदगी का सफ़र पूरा कर लिया होगा।

लेकिन दोनों ही अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में हमेशा ही मौजूद रहेंगे। शायद किसी और सभ्यता को मानवियत के ये दूत मिल जाएं। फिर वो इन यानों में लगे ग्रामाफ़ोन रिकॉर्ड के ज़रिए मानवता का संदेश पढ़ सकेंगे। वायेजर अभियान के ज़रिए 1977 की दुनिया अंतरिक्ष में जी रही है। वायेजर अभियान ने मानवता को अमर कर दिया है।

Wednesday, 14 March 2018

Stiphan Howking (स्टीफ़न विलियम हॉकिंग)

Stiphan Howking (स्टीफ़न  हॉकिंग)

उनके बारे में कहा जाता है कि उनके दिमाग ने इतना काम किया की शरीर ने काम करना बंद कर दिया | आज (१४/०३/२०१८) उस अद्भुत विज्ञानी ने हम सब का साथ छोड़ उस अद्भुत रहस्यमयी दुनिया में चला गया | 
stifan howkin 


ब्रह्मांड में कहीं और भी जीवन है या नहीं, इस बारे में उनका कहना था कि अगर हमारी इस पृथ्वी पर जीवन अपने आप पनपा तो ब्रहमांड के उन अन्य ग्रहों में भी जीवन पनप सकता है, जहां जीवन के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होंगी। लेकिन, पिछली लगभग आधी सदी के दौरान हमारी सारी कोशिशों के बावजूद अब तक कहीं जीवन का पता नहीं लग पाया है। फिर भी, अगर कहीं एलियन हैं तो हमें उनसे सावधान रहना चाहिए। 
Stiphan Howking (स्टीफ़न विलियम हॉकिंग)  बारे में कहा जाता है कि उनके दिमाग ने इतना काम किया की शरीर ने काम करना बंद कर दिया | आज  उस अद्भुत विज्ञानी ने हम सब का साथ छोड़ उस अद्भुत रहस्यमयी दुनिया में चला गया |

स्टीफन हॉकिंग का कहना था कि परग्रही सभ्यताओं को हमें अपना सुराग नहीं देना चाहिए क्योंकि वे अगर तकनीकी दृष्टि से हमसे कहीं अधिक उन्नत प्राणी हुए तो उनके कारण हमारा जीवन संकट में पड़ सकता है।ब्रह्मांड में कहीं और भी जीवन है या नहीं, इस बारे में उनका कहना था कि अगर हमारी इस पृथ्वी पर जीवन अपने आप पनपा तो ब्रहमांड के उन अन्य ग्रहों में भी जीवन पनप सकता है, जहां जीवन के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होंगी। लेकिन, पिछली लगभग आधी सदी के दौरान हमारी सारी कोशिशों के बावजूद अब तक कहीं जीवन का पता नहीं लग पाया है। फिर भी, अगर कहीं एलियन हैं तो हमें उनसे सावधान रहना चाहिए। 



हॉकिंग सोचते थे कि आगामी 20 वर्षों में तो वैज्ञानिकों को बुद्धिमान जीवों का पता लगने से रहा। लेकिन, यह भी सच है कि अंतरिक्ष में घूम रही केपलर दूरबीन ने अब तक 3,000 से अधिक बर्हिग्रहों का पता लगा लिया है। उसने जता दिया है कि हमारी अपनी आकाशगंगा में ही ऐसे अरबों ग्रह हो सकते हैं जिनमें जीवन का अस्तित्व हो सकता है। हॉकिंग का कहना था कि जितना ब्रह्मांड हम देख पा रहे हैं, उसी में हमारी आकाशगंगा मंदाकिनी की तरह कम से कम 100 अरब मंदाकिनियां होंगी। इसका साफ मतलब है कि हम ब्रह्मांड में अकेले नहीं है। फिर भी हमें यही आशा करनी चाहिए कि बुद्धिमान एलियन हम तक न पहुंच पाएं क्योंकि उनसे मानव सभ्यता को भारी खतरा हो सकता है। 
Stiphan Howking (स्टीफ़न विलियम हॉकिंग)


     स्टीफ़न हॉकिंग का जन्म ८ जनवरी १९४२ को फ्रेंक और इसाबेल हॉकिंग के घर में हुआ।    Stephen Hawking आज इतने महान ब्रह्मांड विज्ञानी थे , उनका स्कूली जीवन बहुत उत्कृष्ट नहीं था| वे शुरू में अपनी कक्षा में औसत से कम अंक पाने वाले छात्र थे, किन्तु उन्हें बोर्ड गेम खेलना अच्छा लगता था| उन्हें गणित में बहुत दिलचस्पी थी, यहाँ तक कि उन्होंने गणितीय समीकरणों को हल करने के लिए कुछ लोगों की मदद से पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के हिस्सों से कंप्यूटर बना दिया था| ग्यारह वर्ष की उम्र में स्टीफन, स्कूल गए और उसके बाद यूनिवर्सिटी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड गए| स्टीफन गणित का अध्ययन करना चाहते थे लेकिन यूनिवर्सिटी कॉलेज में गणित  उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उन्होंने भौतिकी अपनाई। स्टीफन हॉकिंग एक मेधावी छात्र थे, इसलिए स्कूल और कॉलेज में हमेशा अव्वल आते रहे। तीन सालों में ही उन्हें प्रकृति विज्ञान में प्रथम श्रेणी की ऑनर्स की डिग्री मिली। जो कि उनके पिता के लिए किसी ख्वाब के पूरा होने से कम नहीं था। गणित को प्रिय विषय मानने वाले स्टीफन हॉकिंग में बड़े होकर अंतरिक्ष-विज्ञान में एक ख़ास रुचि जगी। यही वजह थी कि जब वे महज 20 वर्ष के थे, कैंब्रिज कॉस्मोलॉजी विषय में रिसर्च के लिए चुन लिए गए। ऑक्सफोर्ड में कोई भी ब्रह्मांड विज्ञान में काम नहीं कर रहा था उन्होंने इसमें शोध करने की ठानी और सीधे पहुंच गए कैम्ब्रिज। वहां उन्होंने कॉस्मोलॉजी यानी ब्रह्मांड विज्ञान में शोध किया। इसी विषय में उन्होंने पीएच.डी. भी की। अपनी पीएच.डी. करने के बाद जॉनविले और क्यूस कॉलेज के पहले रिचर्स फैलो और फिर बाद में प्रोफेशनल फैलो बने। यह उनके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी। लेकिन हॉकिंग ने वही किया जो वे चाहते थे। संयुक्त परिवार में भरोसा रखने वाले हॉकिंग आज भी अपने तीन बच्चों और एक पोते के साथ रहते हैं। स्टीफन के अंदर एक ग्रेट साइंटिस्ट की क्वालिटी बचपन से ही दिखाई देने लगी थी। दरअसल, किसी भी चीज़ के निर्माण और उसकी कार्य-प्रणाली को लेकर उनके अंदर तीव्र जिज्ञासा रहती थी। यही वजह थी कि जब वे स्कूल में थे, तो उनके सभी सहपाठी और टीचर उन्हें प्यार से 'आइंस्टाइन' कहकर बुलाते थे। 



जब वो 21 साल के थे तो एक बार छुट्टिय मानाने के मानाने के लिए अपने घर पर आये हुए थे , वो सीढ़ी से उतर रहे थे की तभी उन्हें बेहोशी का एहसास हुआ और वो तुरंत ही नीचे गिर पड़े।उन्हें डॉक्टर के पास ले जायेगा शुरू में तो सब ने उसे मात्र एक कमजोरी के कारण हुई घटना मानी पर बार-बार ऐसा होने पर उन्हें बड़े डोक्टरो के पास ले जाया गया , जहाँ ये पता लगा कि वो एक अनजान और कभी न ठीक होने वाली बीमारी से ग्रस्त है जिसका नाम है न्यूरॉन मोर्टार डीसीस ।इस बीमारी में शारीर के सारे अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते है।और अंत में श्वास नली भी बंद हो जाने से मरीज घुट घुट के मर जाता है। डॉक्टरों ने कहा हॉकिंग बस 2 साल के मेहमान है। लेकिन हॉकिंग ने अपनी इच्छा शक्ति पर पूरी पकड़ बना ली थी और उन्होंने कहा की मैं 2 नहीं २० नहीं पूरे ५० सालो तक जियूँगा । उस समय सबने उन्हें दिलासा देने के लिए हाँ में हाँ मिला दी थी, पर आज दुनिया जानती है की हॉकिंग ने जो कहा वो कर के दिखाया । अपनी इसी बीमारी के बीच में ही उन्होंने अपनी पीएचडीपूरी की और अपनी प्रेमिका जेन वाइल्ड से विवाह किया तब तक हॉकिंग का पूरा दाहिना हिस्सा ख़राब हो चूका था वो stick के सहारे चलते थे । अब हॉकिंग ने अपने वैज्ञानिक जीवन का सफ़र शुरू किया और धीरे धीरे उनकी ख्याति पूरी दुनिया में फैलने लगी।
रोग से पीड़ित होने के बावजूद भी वो किसी का सहारा नही लेते थे और अपने दैनिक कामो को निरंतर रखा | 1974  में उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि मिलने के बाद आपेक्षिता का सिद्धांत और पुंज सिद्धांत पर काम करना शुरू कर दिया था | इस तरह इन दोनों सिद्धांतो को मिलाकर उन्होंने महाएकीकृत सिद्धांत बनाया था | उनके इस सिद्धांत से दुनिया भर में उनका नाम हो गया और उनको एक प्रख्यात वैज्ञानिक के रूप में जाना जाने लगा |
Stiphan Howking (स्टीफ़न विलियम हॉकिंग)
 वे कहते हैं अगर आप विकलांग हैं या अपंग हैंतो इसमें आपकी कोई गलती नहीं है, और साथ ही दुनिया को दोष देने या अपने ऊपर किसी दया की उम्मीद करना सही नहीं है। बस आपके भीतर सकारात्मक विचार होने चाहिए और स्तिथि के अनुसार जितना हो सके अपना अच्छा योगदान देना चाहिए; अगर एक मनुष्य अपंग है तो उसे अपने मन से अपंग या विकलांग नहीं होना चाहिए। मेरे ख्याल से, उन्हें ऐसी गतिविधियोँ में ध्यान देना चाहिए जिससे की एक शारीरिक विकलांगता वाले व्यक्ति के लिए और भी गंभीर बाधा न उपस्थित हो सके। मुझे डर लगता है विकलांगों के लिए खेला जाने वाला ओलोम्पिक मेरे से अपील तो नहीं करगा, पर यह मेरे लिए कहना आसान होगा क्योंकि मुझे एथलेटिक्स पसंद नहीं है। दूसरी ओर देखें तो विज्ञान बहुत ही अच्छा विषय है क्योंकि यह दिमाग का खेल है। बिलकुल सही है यह बात क्योंकि बहुत सारे आविष्कारों से कुछ लोगों नें कमल कर दिया है लेकिन सैद्धांतिक काम लगभग आदर्श है। मेरी विकलांगता नें मेरे कार्य क्षेत्र में कोई बाधा नहीं दिया है जो की है सैद्धांतिक भौतिकी। बल्कि इससे मुझे मदद मिली है मेरे भाषण और प्रशासनिक कार्य पर परिरक्षण करने के लिए। मैं यह सब संभाल पाया , मेरी पत्नी, बच्चे, सहयोगी और छात्रों से ढेर सारे मदद के कारण। मैंने देखा साधारण रूप से लोग मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, पर आपको उन्हें प्रोत्साहन देना चाहिए की वे महसूस करें कि उनके द्वारा किये गए प्रयास उचित और उपयुक्त साबित होंगे।


Tuesday, 27 February 2018

want to perches jio coin

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नई दिल्ली : रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने क्रिप्टो करेंसी को लेकर उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सूचना जारी की है. रिलायंस की तरफ से कहा गया है पिछले कुछ दिनों में मीडिया रिपोर्टस और कई वेबसाइट से पता चला है कि JioCoin एप लॉन्च होने की खबर आ रही है. इसके माध्यम से लोगों से क्रिप्टोकरेंसी में इनवेस्ट करने के लिए कहा जा रहा है. अब Reliance Jio ने क्रिप्टो करेंसी JioCoin को लेकर ग्राहकों को सूचना दी है कि जियो ने इस तरह के किसी भी एप को डाउनलोड करने से ग्राहकों को मना किया है.
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ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा
कंपनी ने यह भी जानकारी दी कि इस तरह का कोई भी एप रिलायंस जियो की ओर से लॉन्च नहीं किया गया है. जियो की तरफ से कहा गया है कि JioCoin के नाम से आने वाला ऐसा कोई भी एप फर्जी है और लोगों को सलाह दी जाती है कि ऐसे किसी भी ऐप से दूर रहे. इस तरह के ऐप से ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है. जियो की तरफ से यह भी कहा गया कि जो लोगों को गुमराह कर रहे हैं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए अधिकार सुरक्षित हैं.

प्ले स्टोर पर 22 एप उपलब्ध
पिछले दिनों व्हाट्सएप पर एक लिंक देकर यह भी दावा किया गया था कि 31 जनवरी 2018 से पहले रजिस्ट्रेशन कराने वाले को फ्री में जियोकॉइन मिलेगा. आपको बता दें कि इस तरह की कई रिपोर्ट सामने आई थी कि JioCoin क्रिप्टो करेंसी के नाम पर करीब 22 एप प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं. जिनमें Jio Coin, Jio Coin Buy और Jio Coin Crypto Currency जैसे एप शामिल हैं. इन एप को 10 हजार से लेकर 50 हजार लोगों ने डाउनलोड दिया गया है.

सभी दावों को झूठा बताया
आपको बता दें कि पिछले दिनों खबर आई थी कि टेलीकॉम इंडस्ट्री में धमाल मचाने के बाद रिलायंस जियो (Reliance Jio) अपनी क्रिप्टोकरेंसी लाने का प्लान कर रहा है. यह भी बताया गया था कि इस प्रोजेक्ट को मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी लीड करेंगे. कुछ वायरल मैसेज में जियो कॉइन के 100 रुपए में लॉन्च होने का भी दावा किया गया था. अब इन सभी खबरों को जियो की तरफ से झूठा बताया गया है.

Treatment of stomach problems (Piles/constipation) with Yoga and Ayurveda method(Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira

बवासीर कुछ दिन पहले बहुत से लोगो द्वारा बवासीर के इलाज के तरीके पूछा जा रहा था। मुझे कई लोगो ने वहां बोला कि इसके लिए सही योग विधि बताऊ। ...