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Thursday, 18 April 2019

Earth Day-2019 (Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira

Earth Day-2019 (Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira

प्रकृति का पृथ्वी को यह एक उपहार ही है जहा अनगिनत प्रजातियां  पायी जाती हैं, जिनमे हम बहुतों को जानतें हैं तो बहुतो को जानना बाकी भी है. पर यह एक दुर्भाग्य ही कहेंगे कि जहा सभी प्रजातियां प्रकृति के संतुलन को बनाये रखने के  लिए जिम्मेदार है वही मानव की गतिविधिया इन सबको असंतुलित बनाने में लगी है।  परिणामस्वरूप दुनिया में कई जीवो के खोने के सबसे बड़े दर का सामना करना पड़ रहा है। 60 मिलियन वर्ष पहले डायनासोर विलुप्त हो गए  पर इसके विपरीत अब प्रजातियों के खोने का मुख्य कारण मानव गतिविधिया ही है।  


Earth Day-2019 (Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira
ऐसा वैश्विक विनाश और वन्यजीवों और पौधों के लगातार कमी होने का कारण सीधा मानव गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। जंगलो की कटाई, जलवायु परिवर्तन, कृषि में कीटनाशकों का प्रयोग, तस्करी और अवैध शिकार इत्यादि मुख्य गतिविधियां इसकी जिम्मेदार है। इन गतिविधियों के परिणाम वैश्विक स्तर पर फैल रहे है।

यदि हम अपने गतिविधियों को रोकने के लिए अब भी कोई बड़ा कार्य नही करते है तो यह विलुप्त होने जैसे परिणाम मानव की कभी ना खत्म हिने वाली विरासत बन जाएगी। 

सभी जीवित जीवों का एक मूल्य होता है और प्रत्येक जीव जीवन के जटिलता में एक भूमिका अदा करतें हैं। हम विलुप्तप्राय जीवो को बचाने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा।

अच्छी खबर यह है कि अभी भी विलुप्त होने की दर को धीमा किया जा सकता है इसके लिए सभी को जिम्मेदारी के साथ तुरन्त ही इस दिशा में कार्य करना होगा।
Earth Day-2019 (Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira

Earth day network 2019 के गोल-
- प्रजातियों के विलुप्त होने के दर, इसके कारण, इसके परिणाम और इसके समाधान के सम्बंध में लोगो को जागरूक करना।
-एक वैश्विक आंदोलन का गठन करना, और प्रकृति और उसके मूल्यों को गले लगाना।
- शाकाहार की ओर रुख करना और कीटनाशक के उपयोग को रोकने जैसे व्यक्तिगत कार्यो को प्रोत्साहित करना।

स्रोत-Earth Day 2019 के बारे में और पढ़ने के लिए विजिट करें https://www.earthday.org/campaigns/endangered-species/earthday2019/
                                                                                   - सूरज जायसवाल कबीरा 

Monday, 4 June 2018

World Environment Day- Beat Plastic Pollution (suraj)

World Environment Day- Beat Plastic Pollution





हमारे पास प्लास्टिक के कई मूल्यवान उपयोग मौजूद है पर हम गंभीर पर्यावरणीय परिणामों के साथ एकल उपयोग या डिस्पोजेबल प्लास्टिक के आदी हो गए हैं। दुनिया भर में, हर मिनट एक मिलियन प्लास्टिक पीने की बोतलें खरीदी जाती हैं, जबकि हर साल दुनिया भर में 5 ट्रिलियन एकल उपयोग प्लास्टिक बैग का उपयोग किया जाता है। कुल मिलाकर, उत्पादित सभी प्लास्टिक का आधा केवल एक बार उपयोग किया जाता है - और फिर फेंक दिया जाता है। प्लास्टिक कचरा अब प्राकृतिक पर्यावरण में इतनी सर्वव्यापी है कि वैज्ञानिकों ने यह भी सुझाव दिया है कि यह एंथ्रोपोसिन युग के भूवैज्ञानिक संकेतक के रूप में कार्य कर सकता है।



World Environment Day- Beat Plastic Pollution


कैसे प्लास्टिक हमारे बीच इतना हावी हुआ, इसका एक मोटा अकड़ा-
1950 से लेकर 1970 के दशक तक बहुत कम मात्रा में प्लास्टिक का उत्पादन हुआ था। इतना कम तो था कि उनका समन्वय पर्यावरण के साथ स्थापित किया जा सकता था।
1990 तक, इन दो दशकों में प्लास्टिक प्रदूषण करने वाले पीढ़ी की संख्या तीन गुनी से ज़्यादा हो चुकी थी ।
World Environment Day- Beat Plastic Pollution

आज हम हर साल 300 मिलियन टन प्लास्टिक का उत्पादन करते है जो कि सम्पूर्ण मानव जाति के वजन के बराबर है ।

हम कुछ अन्य चिंताजनक रुझान देख रहे हैं। 1950 के दशक से, प्लास्टिक उत्पादन की दर किसी भी अन्य सामग्री की तुलना में तेज़ी से बढ़ी है। इन दशकों में हमने टिकाउ और मजबूत प्लास्टिक का उत्पादन भी देखा है और ऐसे प्लास्टिक भी जो एक ही उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है।ई

 99% से अधिक प्लास्टिक तेल, प्राकृतिक गैस और कोयला से प्राप्त रसायनों सउत्पादित होते हैं - जिनमें से सभी गंदे, गैर नवीकरणीय संसाधन हैं। यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो 2050 तक प्लास्टिक उद्योग दुनिया की कुल तेल खपत का 20% हिस्सा ले सकता है।

World Environment Day- Beat Plastic Pollution
नदिया प्लास्टिक्स को बहा कर समुन्द्रों में ले जाती है और समुन्द्रों के प्रदूषित होने का एक बहुत बड़ा कारण बनती है ।


अधिकांश प्लास्टिक कभी नष्ट नही होते । वो छोटे और छोटे होते जाते है और फिर खेतों में, या जानवरो और मछलियों द्वारा निगल लिए जाते है जो फिर बाद में हमारे खाने के प्लेट तक पहुच जाते है ।
नालियो में गिरे प्लास्टिक में पानी जम जाता है और फिर कई तरह के वायरस, मच्छरों के प्रजनन का केंद्र बन जाता है, जो बाद में मलेरिया जैसे बीमारियों का कारण बनता है।

एक आंकड़े के अनुसार साल 2050 तक समुद्रों में मछलियों से ज्यादा तो प्लास्टिक हो जाएंगी यदि यही क्रम चलता रहा तो ।


हम क्या कर सकते है ?
ऐसा नही है कि सरकारें इस ओर ध्यान नही दे रही है, वो कई तरह के नियम, योजनाए चला रखी है ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके । पर हमे खुद भी आगे आकर इसके लिए प्रयास करना होगा ।

World Environment Day- Beat Plastic Pollution
बहुत सी चीजें है जो हम अपने लेवल पर कर सकते है जो एकल प्रयोग की प्लास्टिक का प्रयोग कम से कम हो सके।
- हम फ़ूड सप्लायर पर दबाव बना सकते है कि वो प्लाटिक के चीजो में खाने की पैकिंग ना करे।

- हम सुपर मार्केट में अपना बैग ले कर जा सकते है ताकि वहां से पॉलीथिन ना लेना पड़े ।
-हम प्लास्टिक के छोटे छोटे चीजो जैसे चम्मच, स्ट्रा, प्लाटिक के गिलास इत्यादि के प्रयोग को ना कह सकते है ।
-हम अपने साथ ऐसे प्लास्टिक के बॉटल को कैर्री कर सकते है जो बार बार भरा जा सके ।
- हम अपने लोकल ऑथोरिटी से बात कर सकते है कि वो अपने क्षेत्र में एकल प्रयोग के प्लाटिक पर बैन लगाए ।
- हम लोगो स्व व्यक्तिगत तौर पर बात करके इस सम्बंध में जागरूक कर सकते है ।
- सोसल साइट्स पर प्रदूषण पर लेख लिख कर लोगो को जागरूक कर सकते है ।

वैश्वीक स्तर पर चल रहे इस पर्यावरण की लड़ाई में आप भी योद्धा बनिए और प्रकृति एयर पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दे।
स्रोत - UN environment
अनुवाद - Suraj Kumar Jaiswal

Tuesday, 20 February 2018

black cobra (in Hindi)

ब्लैक कोबरा(black cobra) सांपो के प्रजाति के कोबरा (NAJA NAJA) परिवार से सम्बन्ध रखता है . सामान्यतः इन्हें इंडियन कोबरा भी कहते है, क्योकि यह प्रायः भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, बांग्लादेश, नेपाल , भूटान, श्रीलंका) में पाए जाते है . यह दुनिया के 10 सबसे जहरीले और भारत के सबसे जहरीले सापो में अपना स्थान  बनाये है.

इनके पास अपना आवास नही होता है, यह ऐसी जगह रहना पसंद करते हैं जहाँ चूहे , खरगोश, मेढक और दुसरे सरीसृप आसानी से उपलब्ध हो  . यह किसी एक जगह रुक कर अपने शिकार का इंतजार करते रहते है. यह शिकार को तब तक नही निगलते जब तक की यह पूरी तरह निश्चित ना हो ले कि शिकार मर गया है .
ब्लैक कोबरा सुबह और शाम के समय सबसे ज्यादा क्रियाशील रहते है . यह बहुत शर्मीले होते है अर्थात यह मनुष्यों के संपर्क में आने से हमेशा बचते है . यह अपना पूरा प्रयास करते है की मनुष्यों के सम्पर्क से बच  के रहे . फिर भी शिकार के तलाश में अक्सर घरो में घुश जाते है और मनुष्यों के संपर्क में आ ही जाते है . जब यह खतरा महसूस करते है या इन्हें छेड़ा जाता है तो यह क्रोधित हो कर अपने उग्र रूप का प्रदर्शन करते है . तब यह अपने गर्दन वाले हिस्से को बढ़ाकर फन निकालते है . इसके बावजूद भी अगर छेड़छाड़ जारी रहता है तो यह आर भी घातक  हो जाते है .

अगर इनके विष के प्रभाव की बात करे तो इनके काटने के  30 मिनट के बाद इन्शान के श्वास में अवरोध होने लगता है . इनके विष से बचने का सही तरीका है कि  जितनी  जल्दी संभव हो एंटीवेनम दिया जाए रोगी को .
इनके जहर को कई तरह के दर्द नाशक दवाओ में भी उपयोग किया जाता है .  यह साप  जितने घातक होते है उतने ही  उपयोगी भी . और इनके शर्मीले व्यौहार से ये तब तक  खतरनाक सिद्ध नही  होते जब तक की वो स्वयं पर खतरा न महसूस कर ले  .
उम्मीद करते है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी बहुत जल्द इनके वैज्ञानिक विश्लेष्ण के साथ हम उपस्थित होंगे तब तक इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करिए  . पढने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद.
-Suraj

Wednesday, 7 February 2018

Snakes are not our enemy (Hindi)

सर्प हमारे दुश्मन नही- Suraj


सर्प हमारे दुश्मन नही है बल्कि इसी पर्यावरण का एक अंग है । वो हमें कभी नुकसान पहुचाना नही चाहते है ना ही उनके पास इतना व्यर्थ का विष है जो हमारे अंदर प्रवाह करके बर्बाद करदे । 
पर हम इंसान खुद को उनका दुश्मन मानते है , उन्हें कोने से खोज के निकालते है और मार डालते है । कही इधर उधर स्थान बदलते भी वो दिख जाते है तो हमारी आँखों को नही जँचता और मार देते है । पर सत्य यह है कि कोई भी सर्प खुद इंसानो के आस पास नही आना चाहता है । 
         कई बार सर्प काटते हैं तो विष नहीं छौडते वैसे भी सर्प  अपनी विषग्रंथीयों को काबु में रखते हैं । सांपों के लिए विष निर्माण बहुत ही विशेष कार्य होता है और ये किमती भी होता है ईसलिए वो इसका प्रयोग बहुत किफायत से करते हैं वे काटते वक्त विष की मात्रा पर नियंत्रण रख सकते हैं । कई बार ज्यादा जहरीले सांप के काटने के बावजुद भी घाव में विष नहीं छोडते । सर्प का काटना कितना घातक होगा ये परिस्थिती पर निर्भर करता है सापं विष को युंही व्यर्थ नहीं करते।  सोखा औझा , तंत्र मंत्र से साप काटे के ठीक होने का यही रहस्य है । कोई तंत्र विद्या नही होती सर्पदंश को ठीक करने के लिए । यह निर्भर करता है साप कितना जहरीला है और कितना जहर आपके शरीर के अंदर प्रवाहित किया है । साप काटे तो बेहतर यही है कि नजदीक के चिकित्सा अस्पताल की और तुरंत जाए बजाय किसी झाड़ फूंक के चक्कर में पड़ने के । एक बार फिर कहूंगा साप हमारें दुश्मन नही है , इसी पर्यावरण के अंग है, जिसमे हम रहतें है ।
…क्रमशः
written by- Suraj

Treatment of stomach problems (Piles/constipation) with Yoga and Ayurveda method(Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira

बवासीर कुछ दिन पहले बहुत से लोगो द्वारा बवासीर के इलाज के तरीके पूछा जा रहा था। मुझे कई लोगो ने वहां बोला कि इसके लिए सही योग विधि बताऊ। ...