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Saturday, 3 February 2018

Role of background music in movies.

क्या आपने कभी सोचा है कि फिल्मो में  बैकग्राउण्ड म्यूजिक का कितना बडा सीन होता है किसी भी सीन को जीवंत करने के लिए ? किसी सीन को बिना म्यूजिक के सुन के देखियेगा आपको समझ आ जायेगा वाकई में हम कहना क्या चाहते है । यहां उदाहरण के लिए एक वीडियो दिया जा रहा है, जिसमे पहले आपको बिना म्यूजिक के सुनाया जाएगा फिर म्यूज़िक के साथ और बाद में म्यूजिक चेंज करके ।


तो दोस्तो यहा हम बात करने वाले है ऐसे ही कुछ कलाकारों के बारे में जिन्होनें ने फिल्मो को म्यूजिक देकर फ़िल्म के सीन्स को जीवंत किया ।
तो यहां हमारे पास पहले नंबर है डॉन (DON) . अमिताभ बच्चन जी के इस फ़िल्म में बैकग्राउण्ड म्युजिक ने इतना अच्छा रोल अदा किया कि पुनः इस मूवी के रिमेक वर्सन में भी  वही सेम म्यूजिक डाला गया । इस आकर्षक म्यूजिक को देने वाले कलाकार काम नाम है 'कल्याण जी आनंद'

इसके बाद जो हमारे पास दूसरे नंबर पर नाम है वो है 1975 में रिलीज मूवी शोले (Sholay) . इस मूवी का हर किरदार स्वयं में इतना परफेक्ट है कि तारीफ के लब्ज़ नही रुकते । हर किरदार की तरह इस फ़िल्म में बैकग्राउन्ड म्युज़िक का भी बहुत योगदान रहा । और इस मूवी में बैकग्राउण्ड म्यूजिक को देने वाले शख्श का नाम है 'आर डी बर्मन' ।
इसके बाद जिस मूवी का नाम है हमारे पास वो है  1989 में रिलीज 'त्रिदेव ' । त्रिमूर्ति के सभी फिल्मों में खास बात ये होती है कि यह फ़िल्म अपने बैकग्राउंड म्यूजिक के नाम पर जाना जाता है । त्रिदेव मूवी में जिन्होंने अपना चमत्कारी म्यूजिक दिया है उनका नाम है 'विजू शाह' ।

इसके बाद जो आज की लिस्ट में अंतिम मूवी का नाम है वो है 'कर्ज' । यह नाम मन में आते ही म्यूजिक अपने आप मन मे बजने लगता है । वाकई में इस फ़िल्म का म्यूजिक बहुत आकर्षक है और इस आकर्षक म्यूजिक को देने वाले शख्स का नाम तो वैसे 'लक्ष्मीकांत प्यारेलाल' है पर इस म्यूजिक को क्रिएट करने का श्रेय जाता है 'गोरख शर्मा जी' को ।
तो दोस्तो ये थे कुछ कलाकार जो कुछ प्रसिद्ध फिल्मो में अपनी म्यूजिक देकर उन्हें जीवन्त किया । जल्द ही हम और भी ऐसे कुछ नाम ले कर आएंगे जो ऐसे ही अपनी प्रतिभा से फिल्मो में जान डाला पर कभी पर्दे पर नही रहे ।
Thanks for reading

Thursday, 4 January 2018

Happiness...

Talking with you rises million of feelings. For holding all that feelings, sometimes I ignore you.

Tuesday, 14 February 2017

Story of my valentine

वैलेंटाइन स्पेशल
कहानी #मेरे_वैलेंटाइन की - रागिनी
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उस रात तेज़ बारिश हो रही थी । आसमान में चमकते बिजली ऐसे लग रहे थे जैसे अभी शरीर के आर पार हो जायेंगे । ऊपर से तेज हवाएं रूह तक को कंपा दे रही थी । बादलो की वो गड़गड़ाहट ऐसा लग रहा था कोई चीख चीख के मुझे बुला रहा हो ।
   ऐसा पहली बार नहीं हुआ था । ऐसी तेज हवाएं , बिजली का चमकना , तेज बारिश अक्सर होती रहती है । पर उस दिन जाने क्या अलग था उस तेज़ हवाओ से खिड़कियों को खुलते बंद होते देखने में । मन सहमा हुआ था । क्यों ?नही पता था । कुछ अनिष्ट होने वाला था । पर फिर भी मन को यह कह के फुसला ले रहा था कि ये तो अक्सर का काम है । कुछ नया नही हो रहा । वही बिजली का चमकना , हवा... तभी जोड़ से बिजली चमकी और एक तेज गड़गड़ाहट हुई । मै डर गया । सहम गया ।
  खिड़की के पास बैठ गया और बाहर दिख रहे प्रकोप के डर को महसूस करने लगा । तेज़ बिजली चमकती बाहर पूरा उजाला हो जाता । सब कुछ स्पष्ट देख सकता था । फिर से वही गुप् अँधेरा । और इस अँधेरे में मै अकेला खुद भी ग़ुम हो जाता था । बिजली के चमक से बाहर पानी की बूंदों की उछल कूद की अफरा तफरी देख रहा था । ऐसा लग रहा था वो कुछ कह रही हो । पर मैं नासमझों की तरह उन्हें देख रहा था । बिजली के गड़गड़ाहट को बड़े ध्यान से सुन रहा था । डर तो बहुत लग रहा था उस गड़गड़ाहट के आवाज से । पर शायद उसमे कोई राज़ छिपी थी आज बस उसे ही सुनना चाहता था । वही खिड़की के पास बैठ के उस राज़ को समझते समझते आँख लगी पता नही चला ।
  
सुबह सूरज की किरणे आँखों पे पड़ी तो नींद खुली  । वही खिड़की पे ही सर रख के सो गया था रात को । अभी बाहर सब सामान्य था । कुछ डरावना नही था । कोई बिजली की गड़गड़ाहट नही थी कोई बारिश नही।  पर कुछ रहस्यमय अब भी था , जाने क्या !

    तभी दिमाग में घंटी बजी और याद आया अरे आज दोस्तों के साथ घूमने जाना है । चल जल्दी तैयार हो जाता हु । मै रेडी हुआ और तय स्थान पे पंहुचा । वहा सब मेरी ही प्रतीक्षा कर रहे थे । और इन सब के बीच सबसे ज्यादा बेसब्र थी वो दो आँखें जिन्हें ना देखु तो मेरा दिन ना ढले । जो मुझे ना देखे तो मेरा नजर आया व्यर्थ लगे । उन आँखों में एक दुनिया थी  जिसमे बसने का स्वप्न देखा करता था । वो आँखे दिखने में हिरनी जैसी थी या नही , मुझे नही पता । मै बस उन आँखों में अपना पूरा प्रतिविम्ब देख सकता था ।
  
  एक मधुर सी आवाज सुनाई दिया 'बहुत देर कर दिया , लगता है हमारे शायर जी आज कल अपनी ग़ज़लों में ही अपनी दुनिया बसा लिए है' । यह व्यग्य ! आह ! कितना सुकून मिलता है इस खूबसूरत आवाज़ को सुनकर , जैसे कोई धीरे से रागिनी बजी हो । हा रागिनी । इस रागिनी को सुनकर मै सुधबुध खो देता । मेरी आवाज ,मेरी दुनिया , मेरी निगाहें , मेरा अनुभव बस उसी रागिनी में खो जाता । मै उस आवाज को सुनकर, उन आँखों में अपना प्रतिविम्ब देखकर पूरी जिंदगी बिता दू ।
   
   अब सब निकले वहा से आगे की ट्रिप के लिए बाइक से । मैंने अपनी बाइक रितेश को दे दी और मै रागिनी की बाइक लिया, रागिनी पीछे बैठी । धीरे धीरे सफर आगे बढ़ रहा था । शुष्क ठंडी में बाइक पर बैठ के घूमने आ अनुभव की बहुत सुंदर होता है । और यह सुन्दर सफर और भी ज्यादा खूबसूरत हो गया था क्योकि साथ मेरे रागिनी थी । कितना खूबसूरत एहसास था , मै बाइक चला रहा था, रागिनी बैठी थी ।  दिल कर रहा था कि ये सफर ख़त्म ही ना हो । मेरी दुनिया, मेरी जिंदगी, मेरा प्यार मेरे हर कदम साथ हो और क्या चाहिए । सुख हो दुःख हो , गर कुछ हो संग तो बस तुम हो ।
  
मै इन्ही ख्यालों में खोया था । तभी मयंक ने मुह चिढ़ाते मेरे आगे निकला । मैने भी जोश में अपनी स्पीड बढ़ा दी । तभी रितेश की बाइक ,फिर दिनेश की बाइक आगे निकली । मैंने भी ये भूल कर की स्कूटी पे बैठा हू , स्पीड और तेज़ कर दी । रागिनी मुझे मना करने लगी । शायद वो डरने लगी थी । मैंने उसे चिढ़ाता हुआ बोला ,' आज तुम्हे स्पीड दिखाता हु क्या चीज होती है ।' रागिनी मना करती रही , मै स्पीड बढ़ाता गया । थोड़ी और जोश में आया और अब बाइक दाये बाए काट काट कर चलाने लगा । मै जोश में ये भूल गया था कि अब बाइक मेरे कण्ट्रोल से बाहर हो चुकी है । और फिर वो घडी आयी जो मेरे जीवन में अंधकार कर गयी । अचानक से एक मोड़ आया । और सामने से आ रही ट्रक को समझ नही पाया। बाइक मेरे कण्ट्रोल से बाहर हो चुकी थी । वो सीधा ट्रक के पहिए की और बढे जा रही थी । पूरी स्पीड में । मै मौत को डबल स्पीड में अपने पास आते हुए महसूस कर सकता था । मै हक्का बक्का रह गया । वो छण मैंने ट्रक के पहिए को ठीक आँखों के सामने देखा था । फिर अचानक मुझे एक जोर का धक्का लगा और मै सड़क के किनारे लुढ़क गया । वो रागिनी के हाथों का आखिरी स्पर्श था । मैंने अपनी बंद हो रही आँखों से रागिनी को आखिरी बार देखा । ट्रॅक बाइक समेत रागिनी को रौंदते आगे बढे जा रहा था । उसके अंगों को चींटी की तरह सड़क पे मसले जा रहा था । उसके एक एक अंग चटक कर अलग हो रहे थे । मेरे आँखों के आगे अँधेरा हुए जा रहा था । जब कुछ दिखना बंद हो रहा था । मैंने अपनी बंद हो चुकी आँखों के किनारे से धुंधला सा देखा था , ट्रॅक का पहिया रागिनी के सिर पर होते हुए उसकी उन आँखों को मसलता हुआ निकला निकला जिनमे मै अपना प्रतिविम्ब देखता था । जब हर तरह अँधेरा हो गया तो आखिरी बार मैंने रागिनी की आवाज सुनी । उस आवाज़ में वो रागिनी की धुन नही थी । एक करुण पुकार थी, एक दर्द थी जो कुछ कह रही थी... हा मै जानता हूं वो क्या कह रही थी । वो उस रहस्य को बता रही थी जो कल रात मैंने महसूस किया था । उसके वो आखिरी लब्ज़... उसमे छिपा रहस्य... जो सिर्फ मै समझ सका था ।
     जब मुझे होश आया मै हॉस्पिटल के बेड पे लेटा हुआ था और मेरे सभी अपने मुझे घेरे हुए थे , सिवाय एक के... मेरे मुंह से पहला लब्ज़ निकला  'रागिनी' । हर तरफ सन्नाटा पसरा था । ऐसा लगा जैसे कोई बड़ा ग्रह मेरी छोटी सी दुनिया से आकर टकरा गया , और मेरी दुनिया के दो टुकड़े करके अलग अलग दिशाओं में उछाल दिया । एक टुकड़े पे मै रह गया, एक टुकड़े पे रागिनी...

Saturday, 11 February 2017

Valentine's day

देश काल परिस्थिति अनुसार नियम , मान्यताये बदलती रहती है । कोई 1400 साल पहले बने नियमो को हर समय लागु नही किया जा सकता ।
  एक समय था जब विवाह करना असामाजिक माना जाता था (यूरोपीय देशों में) । धीरे - धीरे मान्यता बदली और विवाह करना समाज का एक जरुरी अंग बन गया । अन्यथा ये समाज ऐसी भी परिस्थिति देखी है जब महिलाये सिर्फ मनोरंजन का साधन हुआ करती थी । समय समय यह मनोरंजन की चीज को बदल लिया जाता था । तब विवाह जैसी महान विचारो को असामाजिक कह के किनारे कर दिया जाता था क्योंकि तब पुरुषों के अनुकूल नही हुआ करती थी यह प्रथा । धीरे धीरे समय परिवर्तन हुआ लोगो का सोच बदला और जन्म लिया Valentine's day .

जय श्री कृष्णा

Treatment of stomach problems (Piles/constipation) with Yoga and Ayurveda method(Hindi) - Suraj Jaiswal Kabira

बवासीर कुछ दिन पहले बहुत से लोगो द्वारा बवासीर के इलाज के तरीके पूछा जा रहा था। मुझे कई लोगो ने वहां बोला कि इसके लिए सही योग विधि बताऊ। ...